Monday, May 21, 2012

आपका आभारी हूं ललित भाई ...

भाई ललित शर्मा जी "सादर हरिस्मरण"                      आज ललित डाट काम पर  आपका आलेख हसदपुर देखा. जानकर अत्यंत हर्षित हूं कि अभनपुर के नज़दीक बाबा साहब का आश्रम है .  अत्यंत्य प्रसन्नता हुई. गुरु-कृपा ही है कि स्वामी शुद्धानंद नाथ के सहोदर स्वामी विकासानंदनाथ के आश्रम में आपने जाकर जो वृतांत लिखा उसे बांच कर मैं स्वयम अपने इस ब्लाग पर पुन: आध्यात्मिक आलेखन करने संकल्पित हूं. स्वामी शुद्धानंद नाथ एवम स्वामी विकासानंद जी वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के बेटे हैं. दौनों संत महान ग्यानी एवम उच्च-शिक्षित प्राप्त हैं. दौनों ने ही कठोर तपस्या कर      
   आध्यात्मिक  तत्व ग्यान प्राप्त किया. तदुपरांत वे लोक कल्याणार्थ निकल पड़े. स्वामी शुद्धानंदनाथ ने "प्रपंच आध्यात्म" योग की बुनियाद रखी. उन्हौने मध्य-वर्गीय परिवारों को सदाचरण में बांधने का संकल्प लिया था . मेरे परिवार से उनका जुड़ाव 1960 में हुआ.तब बाबूजी सालिचौका रोड जिला नरसिंहपुर में सहायक-स्टेशन-मास्टर हुआ करते थे. स्वामी जी ने पाविवारिक शुचिता एवम वैचारिक शुभ्रता का पाठ पढ़ाया. मुझे याद है कि हम बच्चों ने गुरुदेव के पेट पर बैठकर खूब उछलकूद की है. स्वामी जी आज़ के कथित बाबाओं से भिन्न थे. न वे धन-संग्रही पात्र लेकर निकले थे न ही ऐसी कोई लालसा ही रही होगी उनमें. स्वामी जी ने मां सव्यसाची प्रमिला देवी को अन्नपूर्णा कह ही दिया था. कभी भी मातुश्री के किचन में ऐसी स्थिति नहीं देखी हमने कि कोई अतिथि  भूखा आए उसे सुस्वादु आहार न मिले. मां को दीक्षित किया तो उनसे मां ने पूछा था-"मेरी साधना ..?"
गुरुदेव बोले-"जो बिल्लोरे बाबू (बाबूजी को इसी नाम से बुलाते थे गुरुदेव) करें वही तुम्हारी साधना है."
मां तीसरी हिंदी तक शिक्षित थीं संस्कृत के श्लोक, शिवमहिम्नस्त्रोत,चर्पटपजारिका, कैसे पढ़तीं बस इसी दु:ख से दुबली हुईं जा रहीं थीं. फ़िर अचानक एक बार मां पंद्रह बीस दिनों तक केवल मौन रहकर श्लोक,
शिवमहिम्नस्त्रोत,चर्पटपजारिका, आदि की अनुगूंज में डूबी रहीं और अचानक सब कुछ धारा प्रवाह सस्वर अदभुत उन्हौने बताया -"बस गुरु कृपा है.."
आज़ गुरुदेव की ही कृपा है जो "मेलोडी आफ़ लाइफ़" पर आलेखन प्रारम्भ हुआ. 
       आपका आभारी हूं ललित भाई ...
                                          "अलख-निरंजन" 

Tuesday, November 30, 2010

सूचना प्रौद्योगिकी और प्रशासन : श्रीमति इंदिरा मिश्रा का आलेख

श्रीमति इंदिरा मिश्र
साभार:देशबंधु
एक प्रशासन को कई चीजों पर एक साथ ध्यान देना पड़ता है। यदि वह कॉलेज या स्कूल का प्राचार्य है तो उसे छात्रों की शिक्षा की उच्च गुणवत्ता, परिसर की शांति, सुव्यवस्था, स्वच्छता, परीक्षा की गोपनीयता, छात्रों की छात्रवास के प्रबंधन, खान-पान सभी की चिंता रखनी पड़ती है। साथ ही उसे अपने विषय के ज्ञान को भी अद्यतन रखना होता है। किसी दिन वह किसी विश्वविद्यालय का कुलपति भी तो बना सकता है। इसी तरह किसी हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महोदय को भी अपने प्रकरणों का मुस्तैदी निपटारा, अपने फैसलों की उच्च गुणवत्ता, अपनी ईमानदारी और निष्पक्षता की छवि, साथ ही उन्हें सौंपे गए प्रशासनिक कार्यों में कुशलता ही नहीं, बल्कि लॉ जर्नल्स में छपे नवीनतम तथा ऐतिहासिक फैसलों की जानकारी, अपने अधीनस्थ लोगों की कारगुजारियों आदि सभी  की, चिंता रखनी पड़ती है।
यह सभी कार्य यों तो लोग पीढ़ियों से करते आए हैं, किंतु अब सूचना प्रौद्योगिकी ने उनसे होने वाली अपेक्षाओं को कई गुना बढ़ा दिया है। अब सूचना प्रौद्योगिकी का कौशल हर प्रशासक के लिए अपरिहार्य हो गया है। उस पर से यदि प्रशासक किसी जिले का कलेक्टर या किसी विभाग का विभागाध्यक्ष हो, तब तो उसकी जिम्मेदारियों का निर्वहन आधुनिक सूचना तंत्र की सहायता के बिना बखूबी होना, असंभव है। इस बात को यों भी कह सकते हैं कि यदि वह अपने कार्य में सूचना प्रौद्योगिकी का भरपूर उपयोग करें, तो कामल कर दे। आंकड़ों का संकलन, विश्लेषण, किसी विषय पर प्रस्तुतिकरण, ई-मेल से प्रश्नोत्तर, इंटरनेट से नवीन जानकारियों का एकत्रीकरण आदि, यदि वह कर सके, तो सब पर छा जाए, भ्रष्टाचार और पैसे के दुरूपयोग की छुट्टी कर दे, लोगों का जीवन सरल कर दे, उनके आशीषों से अपनी झोली भर ले। सूचना प्रौद्योगिकी का सबसे बड़ा लाभ है कि एक नजर में किसी को भी सभी कारगुजारियों का खाका मिल जाता है। मुख्य सचिव महत्वपूर्ण मामलों की सूची, विधानसभा के अनुत्तरित प्रश्नों की सूची-मय कारणों, तथा अन्य सभी मसलों पर तैयारशुदा तालिका पर एक नजर डाल कर अपना रवैयारूख तैयार कर सकते हैं। कि आज किसी पीठ ठोकनी है और किसको कसना है।


हाल ही में इंडिया टुडे ने अपना एक अंक निकाला था, जिसमें 32 लोगों की विशिष्ट उपलब्धियों की वजह से उनको कर्मवीर होने का खिताब दिया गया था। इनमें से कम से कम 12 लोग आईएएस के थे, एक आईपीएस के एवं कुछ अन्य सरपंच, शिक्षक, महिला बाल विकास संबंधी भी थे। इन 12 आईएएस अधिकारियों में से अधिकांश ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग आज अपरिहार्य है। उनकी सफलता में आईटी का बड़ा योगदान है, जिसकी सहायता से यों बरसों चलने वाले काम हफ्तों में पूरे हो जाते हैं। सरकार में किसी को भी अपने पद पर लम्बे समय तक बने रहने का तो अवसर नहीं मिलता। अवसर हाथ से गया, तो फिर नहीं हाथ आता।


बकौल इंडिया टुडे हरियाणा के अजीत जोशी ने देखा कि उनकी पदस्थापना के जिले सोनीपत में राज्य के चुनाव आयोग और केन्द्रीय चुनाव आयोग के लिए 2 पृथक-पृथक मतदाता सूचियां चल रही थीं। जिले की जनसंख्या मात्र 9 लाख थी, और 1,25,000 ऐसे मतदाता थे, जिनके नाम उन सूचियों में दो-दो बार थे। अत: वे 2 बार वोट डाल सकते थे। साथ ही पूरे प्रदेश में भी यही स्थिति थी, ऐसे दोहरे मतदाता कार्ड बनाने में राज्य सरकार का 5 करोड़ रुपया फिजूल जा रहा था।


आंध्रप्रदेश में कार्यरत 1999 बैच के आईएएस नटराजन गुलजार ने आईटी की उपयोगिता का इस्तेमाल कर पूर्वी ऊर्जा वितरण कम्पनी का कायाकल्प किया और विद्युत संचारण में होने वाली विद्युत की क्षति को 9.5 प्रतिशित से घटाकर 7.9 प्रतिशत कर दिया है।


अनिल स्वरूप ने गरीब लोगों का इलाज करने के लिए एक अभिनव बीमा योजना चलाई। इसमें सदस्यों को 30 रुपए व्यय करने होते हैं और अपना राशनकार्ड दिखाना होता है, जिससे उनका स्मार्ट कार्ड बन जाता है। यह कार्ड एक ऐसी स्वास्थ्य बीमा योजना की सदस्यता का है, जिसके तहत सदस्यों को 725 रोगों के रुपए 30,000 तक खर्च वाले इलाज के लिए कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। इस योजना में केन्द्र सरकार, राज्यसरकार और बीमा कम्पनियां शामिल है। इस मुद्राविहीन (कैशलेस) योजना की खूबी देखकर श्री ओबामा ने भी इसके कुछ भागों को अमेरिकी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपनाया है।
रिग्जिन सम्फेल नामक एक 2003 बैच के आईएएस अधिकारी ने उत्तरप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न की कालाबाजारी रोकने के लिए एक खास तरीका अपनाया। जैसे ही पीडीएस का सामान अधिकृत दुकानों में आ जाता है, एसएमएस के जरिए राशनकार्डधारियों को इसकी सूचना मिल जाती है, और वे तुरंत दुकानों पर पहुंच जाते हैं। इससे दुकानदारों को माल को इधर से उधर करने का वक्त ही नहीं मिलता। वर्ष 2002 में जालौन जिले के डीएम रहते हुए उन्होंने रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरी भुगतानों को सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डालने की व्यवस्था की। अब तो यह इस योजना का अविच्छिन्न अनिवार्य हिस्सा है।


पंजाब में कार्यरत 1997 बैच के एक अन्य आईएएस अधिकारी कृष्णकुमार ने वर्ष 2007 में स्कूली शिक्षा के महानिदेशक रहते हुए सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग करके स्कूली शिक्षा का भरपूर उन्नयन किया। पहले इन्होंने पूरे स्कूल में छात्र-मॉनिटर नियुक्त किए, जिनका काम यह दर्ज करना था, कि शिक्षक ने उस दिन क्या पढ़ाया। इसके बाद इन्होंने 1500 बेहतर शिक्षकों को चुना और विभिन्न स्कूलों के पर्यवेक्षण का काम उन्हें सौंपा। उन्होंने पंजाब प्रांत को आबंटित सर्व शिक्षा अभियान की राश के 96 प्रतिशत का इस्तेमाल का करने का बीड़ा उठाया। (अक्सर देखा यह जाता है कि प्रदेश, केन्द्र से आबंटित राशि का उपयोग ही नहीं कर पाते)। पंजाब में जब उन्होेंने शिक्षा का कार्यभार संभाला था, तब दो लाख से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। अब यह आंकड़ा घटकर 65000 पर पहुंच गया है। धार और झालावाड़ में सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रशासनिक सुधार करना एक अधूरा स्वप्न बन गया था। यह देखकर 1995 बैच के उ.प्र. के आईएएस अधिकारी आमोद कुमार को काफी दुख होता था। सीतापुर जिले में इस व्यवस्था को सफलता से लागू करने की उनकी पहल काबिल-ए-तारीफ है। अपने 'लोकवाणी' शीर्षक कार्यक्रम में उन्होंने यह व्यवस्था की है कि पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप से जनशिकायतों का बेहतर निराकरण हो। इसमें आईटी कियोस्क बनाने की धारणा की थी। ये कियोस्क निजी व्यक्तियों के होते थे, जिनको रखने के लिए ऋण और सब्सिडी दी जाती थी। इन मालिकों ने इस योजना को सफल बनाने में अपना पूरा योगदान दिया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत को लोकवाणी की वेबसाईट पर दर्ज कर दिया जाता है, जिससे वह अपने आवेदन पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रख सकता है। अगर वह अंतिम कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होता, तो जिलाधीश से भेंट कर सकता है। यह कार्यक्रम ग्रामीण जनता के सशक्त्किरण का माध्यम है।


लखनऊ में पले बढ़े गौरव गुप्ता ने कर्नाटक के परिवहन निगम का कायाकल्प कर दिया है। उनका लक्ष्य है कि कार्य में ऊंचा लक्ष्य रखा जाए, और प्रौद्योगिकी का पूरा लाभ उढठाया जाए। इस सद्प्रयास में उन्होंने उक्त निगम के द्वारा इलेक्ट्रॉनिक टिकिट इशु कराने की शुरुआत की और इस पहल के कारण वर्ष 2009-10 में उन्हें ई-गवर्नेस का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। उक्त निगम ने अपने बस अड्डों का भी कायापलट कर दिया है। बैंगालेर में मैसूर रोड पर अत्याधुनिक सैटेलाईट बस स्टेशन जिसका उद्धाटन 2003 में किया गया था, की तुलना अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से की गई थी।


छत्तीसगढ़ संवर्ग के आईएएस डॉ. आलोक शुक्ला ने वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह की 2 रुपए किलो चावल की योजना को कारगर बना दिया। उन्होंने अपने उपसचिव गौरव द्विवेदी सहित खाद्यान्न सचिव के रूप में कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था की बदौलत पीडीएस योजना की खामियों को दूर किया, फर्जी लाभार्थी को छांट कर अलग कर दिया, राज्य के 3.5 लाख अन्त्योदय कार्डों और गरीबी रेखा से नीचे वाले सभी 40 लाख लोगों बीपीएल के कार्डों को खत्म कर दिया। और योजना आयोग के बीपीएल सर्वेक्षण के आधार पर 37 लाख कार्ड जारी किए गए और प्रत्येक कार्ड का अद्वितीय नम्बर एक डिजीटाइज्ड डाटा बेस मं डाल दिया गया। इससे 2.25 लाख फर्जी कार्डों को खत्म करने में सहायता मिली। इसके बाद सस्ते गल्ले की दुकानों को निजी हाथों से लेकर सहकारी संघों और महिला स्व-सहायता समूहों व पंचायतों को देने का फैसला किया गया। उन्हें बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए ऋण दिया गया। कई क्षेत्रों में बेईमानी रोकने के लिए लाभार्थी को यह विकल्प दिया गया कि वह किसी विशेष दुकान से ही अपना खाद्यान्न ले सके। धान कुटाई में अफरा-तफरी के लिए भी दूसरी कम्प्यूटरीकृत प्रणाली जारी की गई। मिल मालिकों को अपने 5 प्रतिनिधियों के फोटो तथा हस्ताक्षरों को पंजीकृत कराने कहा गया, जिन्हें विभाग की वेबसाईट पर डाल दिया गया। धान गोदाम के कर्मचारी वेबसाईट से प्रतिनिधियों की तस्दीक कराकर ही डिलीवरी देने लगे। इससे अफरा-तफरी प्रतिबंधित हुई। इसी को कहते हैं, जहां चाह, वहां राह,। शायद मिल मालिकों पर भी यह तथ्य किसी दिन उजागर हो, कि ईमानदारी ही सर्वोत्तम नीति है। वह सिखाती है कि मन का संतोष धन के संतोष से कम नहीं।

Tuesday, November 16, 2010

विजयी था विजय है मेरी, करते रहो लाख मनचीते !!

मैं तो मर कर ही जीतूंगा जीतो तुम तो जीते जीते !
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कितनी रातें और जगूंगा कितने दिन रातों से होंगे
कितने शब्द चुभेंगें मुझको, मरहम बस बातों के होंगे
बार बार चीरी है छाती, थकन हुई अब सीते सीते !!
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अपना रथ सरपट दौड़ाने तुमने मेरा पथ छीना है.
      अपना दामन ज़रा निहारो,कितना गंदला अरु झीना है
  चिकने-चुपड़े षड़यंत्रों में- घिन आती अब जीते-जीते !!
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    अंतस में खोजो अरु रोको, अपनी अपनी दुश्चालों को
चिंतन मंजूषाएं खोलो – फ़ैंको लगे हुए तालों को-
      मेरा नीड़ गिराने वालो, कलश हो तुम चिंतन के रीते !!
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सरितायें बांधी हैं किसने, किसने सागर को नापा है
लक्ष्य भेदना आता मुझको,शायद तथ्य नहीं भांपा है
    विजयी था विजय है मेरी, करते रहो लाख मनचीते !!
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Thursday, November 11, 2010

"शिर्डी साई बाबा के समाधि-दिवस पर हिंद-युग्म ने की संस्कारधानी के लोकप्रिय एलबम बावरे-फ़कीरा की इन्टरनेट लांचिंग"


प्रतिष्ठित वेब साईट हिंदयुग्म के पोड्कास्ट पेज़ पर आभास जोशी के स्वरों में पिरोया लोकप्रिय एलबम बावरे-फ़कीरा की इन्टरनेट लांचिंग दिनांक १५ अक्टूबर को की गईस्मरण हो कि आज के दिन साईनाथ महाराज ने अपनी जीवन यात्रा को विराम दिया था.आज ही हिंदयुग्म द्वारा स्वर-साम्राग्यी लता  मंगेशकर के स्वर में जेल में बंद कैदियों के लिये गाए भजन को भी नेट पर प्रस्तुत किया. सव्यसाची कला ग्रुप जबलपुर द्वारा प्रस्तुत एवम युवा संगीतकार श्रेयस जोशी के संगीत निर्देशन में बने इस एलबम को अंतर्राष्ट्रीय-स्तर पर प्रतिष्ठित हिंदी-सेवी वेब-साईटhttp://podcast.hindyugm.com/2009/10/launching-baware-faqira-latas-new-jail.html में मौका मिला जो गौरव की बात है. मैं अभिभूत हूं तथा शहर जबलपुर का भी आभारी हूं जहां मुझे इतना स्नेह मिला है. पोलिओ ग्रस्त बच्चों की सहायतार्थ तैयार इस एलबम की प्रतियां बिना किसी लाभ लिये इस पते से प्राप्त कीजिए 
                                 
Contect Girish Billore, 969/A, Gate No.04,Sneh Nagar Road,
              Jabalpur ,
             girishbillore@gmail.com
             girishbillore@hotmail.com
             girish_billore@rediffmail.com
            

Tuesday, September 28, 2010

हमारी चिंता के बिंदूओं के बीच blog4 varta की 200 वीं पोस्ट

राष्ट्र कुल खेल बावरी फ़ैसला, के बीच कम ही लोग ताई का जन्म दिन मना पाएं हैं गोया .कल आलेख तो है लता दीदी पर किंतु कम मयूर मल्हार बक्शी के ब्लाग mmb पर ताज़ा जो जानकारी है बेशक काबिल-ए-तारीफ़ है.इस बीच शिवम की पोस्ट से ज्ञात हुआ कि ब्लॉग 4 वार्ता पर 200 वीं पोस्ट आवेगी. इस हेतु जब पता साजी की गई तो पता चला क्या होना ही था आज़ की चर्चा
 ललित की कलम से ही हुई मन को खुश कर देने वाली पोस्ट ललित जी और टीम को हार्दिक बधाईयां (मुझे छोड़कर)
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स्वर्ण कुमार शुक्ला एक युवा विचारक के रूप में नज़र आए इस ब्लाग पर JeEwAn Ek SaNgHaRsH पोस्ट के ज़रिये पूछ रहे है क्या कश्मीर समस्या का कोई स्थाई हल है???
  किस ब्लाग को किस अखबार ने लिया ये पाबला जी की वेब साईट पर देखिये इधर
Blogs In Media


   

उधर अजय भाई ने गज़ब पोस्ट रद्दी की टोकरी पर लिख दी है जो बनारस के एक अखबार ने छापी सामाजिक विषयों के परिपेक्ष्य में गज़ब लिखा तभी तो अखबार ने प्रकाशन के लायक माना . अर्चना चावजी की पोस्ट बेटियों को समर्पित है . गत्यात्मक-ज्योतिष के लिये संगीता पुरी जी की तारीफ़ किये बिना आप न जाएंगेअब से मौसम संबंधी भविष्‍यवाणियों की कॉपियां मौसम विभाग और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी जाएंगी !! इन सब पोस्टों के अलावा जब एलेक्सा रेंक की बात हो तो  ब्लाग4वार्ता  के अलावा ह्स्तक्षेप का स्थान भी 40 हज़ार पर है. इस संक्षिप्त वार्ता के बाद आप से विदालेना चाहता हूं वायरल के आक्रमण का शिकार कित्ता और रुके नमस्कार

Monday, September 20, 2010

इलैक्ट्रानिक मीडिया को आत्म नियंत्रित होना ही होगा

http://www.merikhabar.com/News/dailyimage/news/Constitution_L.jpg                           यह सब ज़रूरी है कामन-वैल्थ खेलों और अयोध्या पर आने वाले फ़ैसले के मद्दे-नज़र देश में अमन चैन को कायम रखने के लिये ये सब ज़रूरी है और ज़रूरी है अपनी-अपनी आस्था के पहले भारतीय-संवैधानिक व्यवस्था पर आस्था होना....24 सितंबर 2010  के बारे में सोच कर विचलित हैं सबके मन में पलती  भय की चिंगारी को अनदेखा करना अब संभव नहीं. लोग भयातुर हैं सरकार और स्थानीय प्रशासन के अलावा बुध्दिजीवीयों को दृढ़ता दिखानी ज़रूरी है. शान्ति के कुछ सूत्र नीचे देने का साहस कर रहा हूं यद्यपि सरकार ने ये व्यवस्था कर ही ली होगी ऐसा मेरा मानना है. 

  1.    मीडिया को आत्म नियंत्रित होना होगा 
  2.    भारतीय संविधान पर आस्था रखने वाले निर्णय से अविचलित होंगे 
  3.    सायबर कैफ़े पर सतत निगरानी ज़रूरी 
  4.    अवांछित/संदिग्ध गतिविधियों सूचना देने पुलिस को अवश्य दी जावे 
  5.    किसी भी उकसाउ भड़काउ बयान बाज़ी से बचिये 
      http://1.bp.blogspot.com/_cWUx8BLIxXg/SSj0fKy6TQI/AAAAAAAAAb4/P6WVTUlXnAc/s1600/images.jpg